मुंबई:साहित्यिक,सांस्कृतिक,आध्यात्मिक,सामाजिक संस्था "काव्य सृजन" के तत्वावधान में विगत कई वर्षों से साहित्यिक विभूतियों का सम्मान करती चली आ रही है,उसी श्रृंखला में 20 जुलाई 2021 को सायं 06 से 08 बजे तक चले ऑन लाइन समारोह में काव्य सृजन के मार्गदर्शक डॉ. श्रीहरि वाणी का 65 वाँ जन्मोत्सव मनाने हेतु राजस्थान , नागपुर,जौनपुर-उप्र•,मुम्बई,मध्य प्रदेश आदि राज्यों के विभिन्न स्थानों से साहित्यकार विद्वानों ने अपने प्रिय श्रीहरि वाणी को अपनी काव्यात्मक शुभ मङ्गल कामनाओं से सराबोर करते हुए उन्हें सुदीर्घ,सक्रिय,स्वस्थ,प्रसन्न रहने की प्रार्थना प्रभु से की और उनकी सद्य प्रकाशित पुस्तक "दूर देश से आते आखर" का स्वागत करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार का करतल ध्वनि से अभिनंदन किया।
इस आयोजन को काव्य सृजन द्वारा डाली जा रही एक अनूठी परम्परा के रूप में सभी ने सराहा कि यह काव्य सृजन परिवार अपने परिजनों का जन्मोत्सव भी सृजन धर्मिता के रूप में मनाता हैं।शब्द साधकों का सम्मान भी शब्द सुमनों से सामूहिक रूप में करना एक अद्भुत आनन्दोत्सव बन जाता हैं।इस आयोजन की परिकल्पना संस्थापक पं शिवप्रकाश जौनपुरी ने त्वरित निर्णय लेते आकस्मिक काव्य गोष्ठी के रूप में कुछ ही घंटो में साकार कर दीं,संचालन मुंबई के प्रसिद्ध पत्रकार,कवि विनय शर्मा "दीप" ने की तथा अध्यक्षता वरिष्ठ विद्वान् हौसिला प्रसाद" अन्वेषी" ने की। काव्य पाठ करने वालों में सर्वश्री रामेश्वर शर्मा " रामूभैया ", विष्णु शर्मा " हरिहर " किशन तिवारी , डी. एन. माथुर ,, दिगंबर भट , योगिराज " योगी " शारदा दुबे , सौरभ दत्ता " जयन्त ", माताप्रसाद शर्मा, पं श्रीधर मिश्रा, पं. शिवप्रकाश जौनपुरी,हौंसिला प्रसाद अन्वेषी आदि थे।अपने लाडले साहित्यकार को बधाइयाँ देने की जैसे होड़ सी लगी थी|कई विद्वान व विदुषी दिन भर ह्वाटसैप फेशबुक व गूगल मीट पर भी उपस्थित होकर बधाई व शुभकामनाएं दीं।जिनमें प्रमुख रूप से राजीव मिश्र "नन्हें" बिहार से,मुकेश कबीर जी म.प्र.से रश्मिलता मिश्रा जी छ.ग.से अरुण दिक्षित लखनऊ से, मनिंदर सरकार नागपुर से प्रियांशु मुम्बई से रहे।इस अनोखे सम्मान से अभिभूत डॉ. श्रीहरि वाणी ने समस्त उपस्थित विद्वानों को आभार.. प्रणाम निवेदित करते.. अपनी पुस्तक का शीर्षक गीत.. दूर देश से आते आखर.. समारोह के अन्त में प्रस्तुत करते बारम्बार सभी का और काव्य सृजन परिवार का आभार व्यक्त किया। इसके बाद अन्वेषी ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में सभी की प्रस्तुतियों की सारगर्भित व्याख्या करते समारोह को संपूर्णता के शिखर तक पहुंचा दिया।
अन्त में जौनपुरी ने आभार ज्ञापित करते अगस्त में काव्य सृजन की सौ वीं गोष्ठी के अवसर पर विभिन्न भारतीय भाषाओँ का समन्वय करते साहित्यिक सप्ताह मनाने की घोषणा करते हुए सभी को उनकी उपस्थित हेतु धन्यवाद दिया।
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