भायंदर। पत्थरों का महत्व निर्माण (मजबूती), इतिहास (स्मारक, शिलालेख), अर्थव्यवस्था (खनिज, उद्योग), संस्कृति (पूजा, कला), और दैनिक जीवन (आग जलाने से लेकर सजावट) तक फैला है, जो उन्हें मानव सभ्यता का एक अनिवार्य हिस्सा बनाता है, जो मजबूती, सौंदर्य और ऐतिहासिक जानकारी प्रदान करते हैं।
कीमती और मूल्यवान पत्थरों को सजाकर उसे प्रेरणादायक स्वरूप में प्रस्तुत करने वाले नाशिक के सुप्रसिद्ध गार्गोटी द मिनरल म्यूजियम के संस्थापक चेयरमैन तथा प्रबंध निदेशक केसी पांडे का देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान राहुल एजुकेशन के चेयरमैन लल्लन तिवारी ने मीरा रोड स्थित राहुल इंटरनेशनल स्कूल के आलीशान कार्यालय में सम्मान किया। इस अवसर पर आदित्य कॉलेज के चेयरमैन हरिश्चंद्र मिश्रा, समाजसेवी देवेंद्र तिवारी, युवा अधिवक्ता एडवोकेट राजकुमार मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार शिवपूजन पांडे, एडवोकेट भारत पांडे, सुरेंद्र पांडे, रामराज पाल, सुधीर आनंद पांडे, एडवोकेट त्रिभुवन तिवारी, सुरेंद्र मिश्रा, जेबी यादव समेत अनेक लोग उपस्थित रहे। श्री पांडे मुंबई के सुप्रसिद्ध उद्योगपति दिनेश त्रिपाठी के निजी कार्यक्रम में भाग लेने मीरा रोड आए हुए थे।1960 में उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में स्थित सोहसा गांव में पुलिस अधिकारी रहे पंडित श्याम सुंदर पांडे के पुत्र के रूप में पैदा हुए केसी का बचपन से ही पत्थरों के प्रति अटूट प्रेम रहा।
भारतीय नौसेना में चीफ एयर आर्टिफिशिर के रूप में 15 वर्षों तक देश की सेवा की। लोनावाला में प्रशिक्षण के दौरान पत्थरों के करीब आने का अवसर मिला। यहीं से शुरू हुई उनकी पत्थरों की एक नई दुनिया, जिसने उन्हें पूरे विश्व में चर्चित कर दिया। 9 साल तक श्री साईं बाबा संस्थान, शिर्डी के ट्रस्टी रहे। शिर्डी में 8 एकड़ के एरिया में उनका दूसरा प्रकल्प बन रहा है, जिसमें म्यूजियम के अलावा आलीशान होटल का भी निर्माण किया जा रहा है। गार्गोटी म्यूजियम देखने के बाद बाबा रामदेव ने कहा कि इस म्यूजियम में पत्थर भी बोलते हैं। संत राजेंद्र दास मलूक, स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जैसे अनेक आध्यात्मिक संतों ने गार्गोटी म्यूजियम के पत्थरों को अद्भुत बताया है। हर कंकर में शंकर की अनुभूति करने वाले केसी पांडे तमाम उपलब्धियों के बावजूद खुद को समाज का अदना सा सेवक मात्र मानते हैं।
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