हनुमान जयंती पर भक्ति और सेवा का संगम, परिवर्तन फाउंडेशन का भव्य आयोजन


मुंबई। हनुमान जयंती के पावन अवसर पर कांदिवली पश्चिम स्थित गणेश नगर में परिवर्तन फाउंडेशन द्वारा सुंदरकांड पाठ और महाभंडारे का भव्य आयोजन किया गया। इस आयोजन में हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर भक्ति, श्रद्धा और सामाजिक एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया।
परिवर्तन फाउंडेशन कार्यालय (पूजा बिल्डिंग के सामने) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ने लगी थी। पूरे क्षेत्र में हनुमान जी के भजन, कीर्तन और जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। सुंदरकांड पाठ के बाद महाभंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
परिवर्तन फाउंडेशन पिछले कई वर्षों से सामाजिक सरोकारों से जुड़े कार्यों के साथ धार्मिक आयोजनों के माध्यम से समाज को जोड़ने का कार्य कर रहा है। संस्था हर वर्ष जरूरतमंदों को नोटबुक वितरण सहित कई जनहित गतिविधियाँ भी संचालित करती है। इस वर्ष भी संस्था ने अपनी परंपरा को कायम रखते हुए भव्य आयोजन किया।
कार्यक्रम में कई जनप्रतिनिधि और समाज के गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इनमें कांग्रेस विधायक असलम, शिवसेना विभाग प्रमुख संतोष राणे, विधानसभा प्रमुख राजू खान, पूर्व शाखा प्रमुख भास्कर मोरे, पूर्व नगरसेवक कमलेश यादव, अधिवक्ता इंद्रपाल सिंह, अधिवक्ता शैलेश दुबे, डॉ. बृजेश पांडे, समाजसेवी सचिन सिंह, विभाग प्रमुख दिनेश सालवी, पत्रकार जयशंकर तिवारी, पत्रकार धर्मेंद्र पांडे, लेखक संजय सिंह निर्जल, अनिल मिश्रा, अरविंद मिश्रा, पत्रकार मुरारी सिंह, समीउल्लाह खान, समद खान, बीना सिंह ठाकुर सहित अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व शामिल रहे।
इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने परिवर्तन फाउंडेशन के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में भाईचारे, एकता और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने संस्था की सेवा भावना और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भूमिका को प्रेरणादायी बताया।
कार्यक्रम की सफलता में राजकिशोर तिवारी, राजेश सावंत, डॉ. नितिन पवार, प्रदीप पुजारी, मनोहर सिंह देवड़ा, विश्वनाथ दासरी, अजय शुक्ला, जयचंद देविदास वैष्णव, भूपेंद्र सिंह, हितेश देवड़ा, सुधीर प्रसाद, रत्नाकर हेगड़े, दीपक सिंह, जया शेट्टी, दिनेश तायडे, प्रशांत वैष्णवी, बीना सिंह, उपेश नाटेकर, दीपक मोरे, रोनक तिवारी, अविनाश स्वामी, भूषण नाटेकर सहित अन्य कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों का विशेष योगदान रहा।

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