लोढ़ा डेवलपर्स के सीईओ एवं एमडी अभिषेक लोढ़ा की एक और अभिनव पहल
मुंबई। देश की प्रमुख सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्था "लोढ़ा फाउंडेशन" द्वारा भारत के एक मात्र निजी वित्त पोषित सैद्धांतिक भौतिकी अनुसंधान संस्थान का शुभारम्भ बुधवार, 27 मई, 2026 को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में किया गया।
यह जानकारी देते हुए लोढ़ा डेवलपर्स के CEO एवं प्रबंध निदेशक और लोढ़ा फाउंडेशन के ट्रस्टी अभिषेक लोढ़ा ने बताया कि भारत आने वाले वर्षों में एक वैश्विक लीडर बनने के लिए तैयार है। इसलिए लोढ़ा फाउंडेशन का मानना है कि एक विकासशील राष्ट्र से एक विकसित राष्ट्र बनने की इस यात्रा में हम सार्थक योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि फाउंडेशन में हम 'उत्कृष्टता के परोपकार' (Philanthropy of Excellence) का अभ्यास करते हैं और इस दिशा में कई कार्यक्रम शुरू किये गये हैं। इसी क्रम में अत्यंत विचार पूर्वक तैयार की गई और विकसित राष्ट्र बनने की यात्रा में अहम योगदान देने वाली सबसे नई पहल 'लोढ़ा थ्योरिटिकल फिजिक्स इंस्टीट्यूट' (LTPI - लोढ़ा सैद्धांतिक भौतिकी संस्थान) है, जिसे 27 मई, 2026 को मुंबई स्थित लोढ़ा वर्ल्ड टॉवर में लॉन्च किया गया। इस अवसर पर महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा एवं श्रीमती मंजू लोढ़ा ने लोढ़ा फाउंडेशन की ओर से सभी विशिष्ट अतिथियों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों और उपस्थित महानुभावों का हार्दिक स्वागत किया तथा अपने प्रेरणादायक विचार व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार सबसे बड़ी शक्ति हैं और ऐसे संस्थान आने वाले समय में भारत को वैश्विक एवं वैज्ञानिक नेतृत्व प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। उन्होंने बताया कि वुल्फ प्राइज विजेता प्रोफेसर जैनेंद्र जैन के नेतृत्व में LTPI, मौलिक भौतिकी में साहसिक विचारों को प्रोत्साहित करेगा। लोढ़ा थ्योरिटिकल फिजिक्स इंस्टीट्यूट की परिकल्पना भारत में सैद्धांतिक भौतिकी में मौलिक अनुसंधान के लिए एक समर्पित केंद्र के रूप में की गई है। यह संस्थान भारत और दुनिया भर के अग्रणी वैज्ञानिकों के बीच केंद्रित अनुसंधान कार्यक्रमों, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों और सार्थक सहयोग के लिए एक शैक्षणिक वातावरण तैयार करके निरंतर और दीर्घकालिक अनुसंधान की आवश्यकता को पूरा करने का प्रयास करेगा। श्री अभिषेक लोढ़ा ने कहा कि लोढ़ा फाउंडेशन में हम जो कुछ भी करते हैं, उसमें उत्कृष्टता के प्रयास करना, सबसे बड़ा प्रभाव पैदा करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। चाहे देश भर से प्रतिभावान विद्यार्थियों की पहचान और उन्हें त्वरित कार्यक्रमों में शामिल करना हो, या शहरी स्थिरता के समाधानों में निवेश करना हो। या फिर 'लोढ़ा मैथमैटिकल साइंसेज इंस्टीट्यूट' और अब 'लोढ़ा थ्योरिटिकल फिजिक्स इंस्टीट्यूट' के माध्यम से नवाचार और अनुसंधान को सहायता व बढ़ावा देना हो, हम भारत के एक विकसित राष्ट्र बनने के इस महत्वपूर्ण सफर में सार्थक योगदान देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि मूलभूत विज्ञान में क्रांति के बाद ही परिवर्तनकारी तकनीकी युगों की शुरुआत होती है। इसी विजन पर LTPI की स्थापना की गई है । यह भारत में मौलिक अनुसंधान के लिए एक समर्पित केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जो दुनिया भर से सर्वश्रेष्ठ दिमागों को आकर्षित करेगा और बौद्धिक जिज्ञासा की संस्कृति को बढ़ावा देगा । असाधारण फैकल्टी, पोस्ट डॉक्टरल फेलो और दीर्घकालिक आगंतुकों को एक साथ लाकर, यह संस्थान बौद्धिक स्वतंत्रता, स्थिरता, सहयोग की भावना और गहरे प्रश्नों व साहसिक विचारों को तलाशने का साहस प्रदान करेगा, जिससे ऐसी खोज संभव होंगी, जिनका गहरा प्रभाव आने वाले दशकों में दिखाई देगा। लोढ़ा फाउंडेशन के मुख्य मार्गदर्शक आशीष कुमार सिंह ने कहा कि LTPI का उद्देश्य दुनिया भर के सबसे असाधारण बुद्धिमानों को एक साथ लाना और बिना किसी बाधा के भौतिकी के बारे में खुलकर सोचने में समय बिताना है। उन्होंने कहा कि जब असाधारण दिमाग एक साथ आते हैं, तो वे असाधारण परिणाम देते हैं और यह एक ऐसा दाॅंव है, जो हम भारत के लिए लगा रहे हैं। उन्होंने बताया कि LTPI (Lodha Theoretical Physics Insititute) का नेतृत्व संस्थापक निदेशक प्रो. जैनेंद्र के. जैन करेंगे, जो एक प्रसिद्ध सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी हैं और उन्हें 'ऑलिवर ई. बकली प्राइज' एवं भौतिकी में 'वुल्फ प्राइज' मिल चुका है । उन्होंने 'कंपोजिट फर्मिओन्स' नामक उभरते कणों की खोज की। इसका वर्णन करने वाले उनके सिद्धांत ने correlated quantum matter की समझ को बेहद समृद्ध किया है और आधुनिक सैद्धांतिक भौतिकी को आकार देना जारी रखा है। प्रो. जैन ने कहा कि सैद्धांतिक भौतिकी प्रकृति के प्रति हमारी समझ के केंद्र में है। सैद्धांतिक भौतिकी में प्रगति ने ऐतिहासिक रूप से वैज्ञानिक सोच को आकार दिया है और विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तनकारी विकास की नींव रखी है।2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने के लिए, भारत को विश्व स्तरीय वैज्ञानिक अनुसंधान बुनियादी ढांचे के साथ मजबूत संस्थानों का निर्माण करना अनिवार्य होगा। LTPI इसी दिशा में एक विशेष रूप से महत्वपूर्ण प्रयास होगा, क्योंकि यह भारत में पूरी तरह से निजी तौर पर वित्त पोषित पहला भौतिकी संस्थान होगा। उन्होंने बताया कि एक बड़ी शुरुआत के साथ, LTPI 'इमर्जेंट फेनोमेना इन क्वांटम हॉल सिस्टम्स' (EPQHS-10) पर 10वीं अंतर्राष्ट्रीय बैठक की मेजबानी कर रहा है । यह तीन दिवसीय कार्यशाला श्रृंखला दुनिया भर के कई प्रसिद्ध वैज्ञानिकों की मेजबानी करेगी, जो रोमांचक हालिया खोजों की घोषणा करेंगे और भौतिकी के क्षेत्र में भविष्य की आशाजनक दिशाओं पर चर्चा करेंगे । संस्थान की प्रतिष्ठा स्थापित करने वाले एक महत्वपूर्ण मील के पत्थर के रूप में कार्य करते हुए, EPQHS-10 की मेजबानी करना यह दर्शाता है कि LTPI में पहले दिन से ही तैयार किया जा रहा शैक्षणिक पारिस्थितिकी तंत्र कितना गम्भीर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक और विश्व स्तरीय गुणवत्ता का है। समारोह के दौरान, नोबेल पुरस्कार विजेता और मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट फॉर सॉलिड स्टेट रिसर्च के डायरेक्टर एमेरिटस क्लाउस वॉन क्लिट्जिंग ने 'टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च' (TIFR) के सहयोग से आयोजित एक सार्वजनिक व्याख्यान दिया। इस व्याख्यान में बताया गया कि कैसे "क्वांटम हॉल इफेक्ट" की खोज अत्यधिक परिस्थितियों में इलेक्ट्रॉनों के व्यवहार पर बुनियादी, जिज्ञासा-संचालित अनुसंधान से उभरी। और कैसे इस अप्रत्याशित खोज ने अंततः माप मानकों की अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली (international system of measurement standards) में क्रांति ला दी इस अवसर पर श्रीमती मंजू लोढ़ा द्वारा एक विशेष काव्यात्मक अभिव्यक्ति प्रस्तुत की गई, जो इस प्रकार है:-
“LTPI Launch — विज्ञान का नवदीप”
आज सजा है ज्ञान का मंदिर, आज जली है नई मशाल, जहाँ विज्ञान के पंख लगाकर, सपने छू लेंगे हर आकाश। यह केवल एक मंच नहीं है, यह भविष्य की पहचान है, जहाँ जिज्ञासा बनती शक्ति, और शोधों से बढ़ता मान है। गिरते सेब से प्रेरित होकर, न्यूटन ने ज्ञान जगाया, गति और गुरुत्वाकर्षण का सुंदर नियम समझाया। समय, प्रकाश और ब्रह्मांड का
जिसने नया विज्ञान दिया, अल्बर्ट आइंस्टीन ने सोच को नया आसमान दिया। दूरबीन से नभ को देखा, सत्य की राह अपनाई, गैलीलियो ने नई चेतना जग में लाई। विद्युत की अद्भुत धारा से दुनिया को जिसने सजाया, निकोला टेस्ला ने नवयुग का दीप जलाया। असंख्य प्रयोगों की तपस्या से अंधियारा दूर भगाया, थॉमस एडीसन ने बल्ब का उजियारा लाया। रेडियम की खोज में जिसने जीवन अपना खपा दिया, मैरी क्यूरी ने नारी शक्ति का मान बढ़ा दिया। ब्लैक होल के गहरे रहस्य दुनिया को समझाने वाले, स्टीफेन हॉकिंग थे, जिन्होंने हौसलों से जग जीता। भारत माँ भी गर्वित हुई, जब सी वी रमन ने कमाल दिखाया, प्रकाश की किरणों के बदलते रंगों का अद्भुत रहस्य समझाया। ज्ञान और गणित की शक्ति से नया सिद्धांत बनाया,
सत्येन्द्र नाथ बोस ने आइंस्टीन संग इतिहास रचाया। परमाणु शक्ति के क्षेत्र में भारत को जिसने बढ़ाया, होमी जहांगीर भाभा ने विज्ञान का मान बढ़ाया। अंतरिक्ष के सपनों को भी जिसने साकार बनाया, विक्रम साराभाई ने भारत का गौरव बढ़ाया। मिसाइल मैन कहलाकर भी मन से रहे महान, एपीजे अब्दुल कलाम ने युवाओं को दिए ऊँचे अरमान। ये वैज्ञानिक दीप समान हैं, ज्ञान जिनसे जगमगाता है, इनकी मेहनत और खोजों से मानव आगे बढ़ पाता है। विज्ञान हमें यह सिखलाता, हर मुश्किल आसान बने, जिज्ञासा और कर्म के बल पर मानव चाँद समान बने। कभी रसायन की प्रयोगशाला में, तत्वों ने मिलकर रंग भरे, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन ने, जीवन के जल के दीप धरे। कार्बन की छोटी सी रचना ने, हीरे जैसा रूप लिया, विज्ञान ने मिट्टी के कण को, सोने से बढ़कर मूल्य दिया।कभी अम्ल और क्षार मिले तो, संतुलन का संदेश मिला, हर क्रिया ने यह सिखलाया संघर्षों से नव जीवन खिला। आज इसी प्रेरणा की धरती पर, ज्ञान के दीप प्रज्वलित होंगे, प्रो. जैनेंद्र जैन की शोधों से, विज्ञान के नये पथ निर्मित होंगे। “कॉम्पोज़िट फर्मियॉन” की खोज ने, दुनिया को नई दिशा दिखाई, वुल्फ प्राइज़ जैसे महान सम्मान ने, भारत की प्रतिभा चमकाई। दूर विदेशी धरती से आए, नोबेल विजेता वैज्ञानिक महान,
प्रो. क्लॉस वॉन क्लिट्जिंग ने, बढ़ाया विज्ञान का गौरवमान। “क्वांटम हॉल इफेक्ट” की खोज ने, भौतिकी को नया विस्तार दिया, सूक्ष्म कणों की अद्भुत दुनिया का, मानव को नया आधार दिया। यहाँ सूत्र केवल अक्षर नहीं, हर सूत्र जीवन गाता है, विज्ञान वही है जो मानव को, अज्ञान से ऊपर उठाता है। लोढ़ा फाउंडेशन की प्रेरणा ने, शिक्षा का नव दीप जलाया है, अभिषेक लोढ़ा के संकल्पों ने, हर युवा को आगे बढ़ाया है। मंगल प्रभात लोढ़ा जैसे, सेवा जिनकी पहचान बनी, समाज और संस्कृति के संग, जनहित की सुंदर शान बनी। आईएएस ऑफिसर आशीष सिंह के प्रयासों ने, कर्तव्य का मान बढ़ाया है, ईमानदारी और सेवा से, प्रशासन को गौरव दिलाया है। जब प्रयोगों में सपने जलते,
तब इतिहास नया बनता है, छोटी-सी जिज्ञासा का दीपक, एक दिन सूरज बनता है। आओ, मिलकर प्रण यह लें, ज्ञान का दीप जलायेंगे, भारत को विज्ञान की शक्ति से, विश्व शिखर तक ले जायेंगे। “LTPI” केवल लॉन्च नहीं, एक नवयुग का उद्घोष है, जहाँ विज्ञान, संस्कार और शिक्षा का, संगम सबसे विशेष है। इस मंच से न जाने कितने नये वैज्ञानिक जन्म लेंगे..!
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