विकास कार्यों, जलभराव, सड़कों की गुणवत्ता और संभावित वित्तीय अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग
वसई: वसई-विरार शहर महानगरपालिका के नगर अभियंता प्रदीप पचांगे के कार्यकाल को लेकर मानवाधिकार कार्यकर्ता संजय गुप्ता ने गंभीर सवाल उठाते हुए राज्य सरकार से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में वर्षों से मानसून के दौरान जलभराव, बदहाल सड़कें, जल निकासी व्यवस्था की विफलता और विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर नागरिकों में भारी असंतोष है।
संजय गुप्ता ने मांग की है कि नगर अभियंता के पूरे कार्यकाल में हुए सभी विकास कार्यों का स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय ऑडिट कराया जाए। साथ ही सड़कों, सीवर लाइन, वर्षा जल निकासी प्रणाली, नालों और अन्य सार्वजनिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता का परीक्षण विशेषज्ञ समिति से कराया जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच आवश्यक समझी जाए तो निष्पक्षता बनाए रखने के लिए जांच पूरी होने तक संबंधित अधिकारी को प्रशासनिक जिम्मेदारियों से अलग करने पर विचार किया जाए। यदि जांच में वित्तीय अनियमितता, लापरवाही, नियमों के उल्लंघन, घटिया निर्माण, पद के दुरुपयोग या भ्रष्टाचार के आरोप सिद्ध होते हैं, तो संबंधित अधिकारियों, अभियंताओं और ठेकेदारों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।
संजय गुप्ता ने जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की भी मांग की, ताकि नागरिकों को यह जानकारी मिल सके कि उनके कर के पैसे से किए गए विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति क्या है और यदि कहीं अनियमितता हुई है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है।
उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) या अन्य सक्षम जांच एजेंसी से भी मामले की जांच कराई जाए। साथ ही राज्य सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की गई है।
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