आशीर्वाद गीतगंगा ग़ज़ल सागर में 'कृष्ण पद' का विमोचन


 

दास नारायण की काव्य परंपरा भारतीय साहित्य को एक नया आयाम देने वाली है- विपिन गुप्ता

मुंबई- आज के समय में ऐसे साहित्यिक और सांस्कृतिक आयोजन विरले मिलते हैं जहाँ गंभीर साहित्यिक गोष्ठियाँ और उच्चस्तरीय कवि सम्मेलन हो, वहीं आशीर्वाद संस्था द्वारा आयोजित "गीत गंगा ग़ज़ल सागर" ने साहित्य, संगीत और संस्कृति का एक अविस्मरणीय संगम प्रस्तुत किया। यह उद्गार सुप्रसिद्ध भजन सम्राट पद्मश्री अनूप जलोटा जी ने गोरेगांव पश्चिम के अजंता पार्टी हाल में मुख्य अतिथि के रूप में व्यक्त किए। इस अवसर पर, 21 वीं सदी के भक्त प्रवर कवि दास नारायण अग्रवाल की कृति "कृष्ण पद" का लोकार्पण किया गया। पुस्तक पर सारगर्भित विचारों का आदान-प्रदान किया गया प्रो. करूणाशंकर उपाध्याय, विरेन्द्र याज्ञिक, दैनिक नेशनल एक्सप्रेस, नई दिल्ली के संस्थापक संपादक विपिन गुप्ता ने। उन्होंने कहा कि दास नारायण की काव्य परंपरा भारतीय साहित्य को एक नया आयाम देने वाली है और 'कृष्ण पद' का सृजन इस परंपरा की जीवंत मिसाल है।
इस अवसर पर आशीर्वाद के अध्यक्ष बृजमोहन अग्रवाल एवं सुभाष अग्रवाल ने अनूप जलोटा को आशीर्वाद रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया और सूफी गायिका कविता सेठ ने भजन तथा अरुण बख्शी ने अपने गायन से समां बांध दिया। 
कार्यक्रम का सबसे भावपूर्ण क्षण तब आया जब भजन सम्राट अनूप जलोटा ने बिना किसी वाद्य-संगत के, केवल अपनी मधुर और सधी हुई आवाज़ में तरन्नुम के साथ, अनेक लोकप्रिय भजन प्रस्तुत किए। उनकी सुरमयी प्रस्तुति ने पूरे सभागार को भक्तिरस में सराबोर कर दिया।जलोटा की सहज, आत्मीय और भावपूर्ण प्रस्तुति ने यह सिद्ध कर दिया कि सच्चा संगीत किसी वाद्य का मोहताज नहीं होता जिसे श्रोताओं ने अपनी तालियों की गड़गड़ाहट से उनके में ताल मिलाया। चार घण्टे तक चले इस कार्यक्रम में  "गीत गंगा ग़ज़ल सागर" में प्रतिष्ठित कवियों और शायरों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं का पाठ किया जिनमें थे देवमणि पांडेय, महेश दुबे, दास नारायण अग्रवाल, ओबेद आज़म आजमी, नवीन चतुर्वेदी, अर्चना जौहरी, डॉ शैलेश श्रीवास्तव, रजिया रागिनी, विनोद दुबे, रवि यादव तथा शिवदत्त अक्स। अतिथियों का स्वागत आशीर्वाद की निदेशिका नीता बाजपेयी, डॉ बनमाली चतुर्वेदी, डॉ जे पी बघेल, अशोक त्रिवेदी, राजीव रोहित, श्रेयांश शुक्ल, कृष्णा गौतम, संगीता बाजपेयी, निरुपमा श्रीवास्तव, शेखर श्रीवास्तव ने किया।
कार्यक्रम का संचालन कुमार जैन ने किया। 
इस अवसर पर सुलेमान फारुकी, आफताब आलम, अनिरुद्ध पाण्डेय, गुलशन मदान, डॉ खंडू मालवे खरमा, आलोचक रामकुमार, संजीव शुक्ला, आनंद मिश्र, राजकिशोर तिवारी, सुनील सिंह, राजेश ध्यानी, डालचंद गुप्ता, ममता सिंह, रीमा राय सिंह, अमर त्रिपाठी, अजय गोविंद, रवि जैन, नरोत्तम शर्मा, हेमलता त्रिपाठी, शुभकीर्ति माहेश्वरी, गोपीकृष्ण बूबना, अनिल गलगली, विवेक अग्रवाल, रागिनी शाह, मंजुला जगतरामका, कमर हाजीपुरी, प्रेम प्रकाश दुबे, राकेश दुबे, रौनक तिवारी, नीरजा तिवारी, रवींद्र यादव रवि, संगीता दुबे, डॉ वीरेंद्र मिश्र के साथ अनेकानेक रचनाधर्मियों सहित स्रोताओं से मिला प्रतिसाद एक सुखद अनुभूति की भाँति रहा और इस प्रयास की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए यह गौरवशाली परंपरा डॉ उमाकांत बाजपेयी की स्मृति में आयोजित हुई, अनेक ललितकला प्रेमियों से खचाखच भरे सभागार में कार्यक्रम के आरम्भ से अन्त तक करतल ध्वनियाँ गूँजती रहीं। राजेश विक्रांत ने धन्यवाद ज्ञापन किया।
                            
 

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