खेतों से FDA कमिश्नर तक: संघर्ष, ईमानदारी और सख्ती की मिसाल हैं IAS तुकाराम मुंढे



जानिए FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे की प्रेरणादायक कहानी
मुंबई:(खबरें पूर्वांचल की विशेष रिपोर्ट)
मुंबई:महाराष्ट्र में यदि किसी IAS अधिकारी की पहचान उनकी सख्त कार्यशैली, ईमानदारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ बेखौफ कार्रवाई के लिए होती है, तो उनमें तुकाराम हरिभाऊ मुंढे का नाम सबसे प्रमुख माना जाता है। वर्ष 2005 बैच के IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे वर्तमान में महाराष्ट्र खाद्य एवं औषध प्रशासन (FDA) के आयुक्त हैं। उन्होंने मई 2026 में यह जिम्मेदारी संभाली और पदभार ग्रहण करते ही मिलावटी खाद्य पदार्थों, नकली दवाओं, प्रतिबंधित गुटखा और खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान शुरू कर दिया।

बीड जिले के एक साधारण किसान परिवार में जन्मे तुकाराम मुंढे ने आर्थिक कठिनाइयों के बीच अपनी पढ़ाई पूरी की। जिला परिषद विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा लेने के बाद उन्होंने इतिहास में स्नातक और राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर किया। वर्ष 2004 की UPSC परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 20 प्राप्त कर उन्होंने IAS बनने का सपना साकार किया।

अपने प्रशासनिक कैरियर में मुंढे ने नगर आयुक्त, जिला कलेक्टर और कई महत्वपूर्ण विभागों में जिम्मेदारियां निभाईं। नियमों से समझौता न करने की उनकी छवि के कारण उनका कई बार तबादला भी हुआ, लेकिन उन्होंने हर पद पर पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी।

FDA आयुक्त बनने के बाद उनकी अगुवाई में विभाग ने पूरे महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा और दवा गुणवत्ता को लेकर व्यापक अभियान चलाया। हाल के महीनों में सैकड़ों छापेमारी, प्रतिबंधित उत्पादों की जब्ती और नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की गई है।

आज तुकाराम मुंढे केवल एक प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि ईमानदार और जवाबदेह शासन का प्रतीक माने जाते हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति भी मेहनत, अनुशासन और ईमानदारी के दम पर व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकता है।

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