न बैसाखी, न ट्राइसाइकिल… हादसे और गरीबी के बावजूद नहीं छोड़ी पढ़ाई!!
बलिया, उत्तर प्रदेश। जिले के दिघेड़ा गांव की 7 वर्षीय रागिनी की कहानी सामने आने के बाद हर कोई भावुक है। एक हादसे में अपना एक पैर गंवाने के बावजूद रागिनी ने पढ़ाई का सपना नहीं छोड़ा। आज भी वह बिना बैसाखी और ट्राइसाइकिल के एक पैर के सहारे स्कूल तक पहुंचती है।
बताया जा रहा है कि रागिनी जब महज 6 महीने की थी, तभी एक हादसे में उसका पैर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उसके लिए बेहतर इलाज और कृत्रिम पैर जैसी सुविधाओं का इंतजाम नहीं हो सका।
रागिनी करीब 400 मीटर की दूरी एक पैर के सहारे तय कर स्कूल पहुंचती है। रास्ते में मुश्किलें आती हैं, लेकिन पढ़ाई के प्रति उसका जुनून उसे आगे बढ़ने की हिम्मत देता है। वह कक्षा-1 की छात्रा है और पढ़-लिखकर आगे बढ़ना चाहती है।
रागिनी की स्थिति की जानकारी सामने आने के बाद प्रशासन ने मामले का संज्ञान लिया है। जिलाधिकारी की ओर से संबंधित अधिकारियों और चिकित्सकों की टीम को मौके पर भेजकर बच्ची की स्थिति की जानकारी लेने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने रागिनी को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा भी दिया है।
रागिनी की हिम्मत बनी मिसाल
रागिनी की कहानी सिर्फ एक दिव्यांग बच्ची के संघर्ष की कहानी नहीं, बल्कि उसके हौसले और शिक्षा के प्रति जुनून की मिसाल है। जहां सुविधाओं का अभाव उसके रास्ते में बड़ी चुनौती बना हुआ है, वहीं उसका जज्बा उसे हर दिन स्कूल तक लेकर जाता है।
अब उम्मीद है कि प्रशासन की पहल के बाद रागिनी को आवश्यक सहायता, कृत्रिम पैर या आने-जाने के लिए उपयुक्त साधन उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि उसे एक पैर के सहारे स्कूल जाने की मजबूरी से राहत मिल सके और उसकी पढ़ाई बिना किसी बाधा के जारी रह सके।
दिघेड़ा, बलिया, उत्तर प्रदेश
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