नालासोपारा, : नालासोपारा शहर की ऐतिहासिक और पुरातात्विक विरासत को देखते हुए शहर का नाम बदलकर ‘शूर्पारकबुद्धधाम’ किए जाने की मांग उठी है। स्थानीय जागरूक नागरिक एवं कर्मभूमिपुत्र रवि भूषण ने इस संबंध में वसई-विरार शहर महानगरपालिका के मनपा आयुक्त को एक प्रतिनिधि पत्र सौंपकर आधिकारिक मांग की है।
प्रतिनिधि पत्र में दावा किया गया है कि पाली त्रिपिटक के ‘पुन्नोवदा सुत्त’ के अनुसार भगवान बुद्ध का इस क्षेत्र में आगमन हुआ था। इसके अलावा वर्ष 1882 में हुई खुदाई में मिले सोपारा स्तूप, भगवान बुद्ध से जुड़े पवित्र अस्थि अवशेष तथा सम्राट अशोक के 8वें और 9वें शिलालेख को इस क्षेत्र की बौद्ध विरासत के महत्वपूर्ण प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
रवि भूषण के अनुसार, नालासोपारा की ऐतिहासिक और बौद्ध विरासत को देखते हुए शहर को ‘शूर्पारकबुद्धधाम’ नाम दिए जाने से क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय बौद्ध पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान मिल सकती है। उनका कहना है कि इससे नालासोपारा को बोधगया और सारनाथ जैसे प्रमुख बौद्ध स्थलों की तर्ज पर विकसित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
पत्र में महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम, 1949 की धारा 3, केंद्रीय गृह मंत्रालय के नाम परिवर्तन संबंधी नियमों तथा AMASR अधिनियम, 1958 का हवाला देते हुए इस मांग के लिए कानूनी आधार होने का दावा किया गया है।
रवि भूषण ने प्रशासन से मांग की है कि महानगरपालिका में इस संबंध में तत्काल प्रस्ताव पारित कर इसे राज्य और केंद्र सरकार को भेजा जाए। साथ ही, शहर के नाम को लेकर चल रही अन्य प्रक्रियाओं को रोकने की मांग भी पत्र के माध्यम से की गई है।
अब देखना होगा कि नालासोपारा का नाम ‘शूर्पारकबुद्धधाम’ करने की इस मांग पर महानगरपालिका और राज्य सरकार की ओर से क्या निर्णय लिया जाता है।
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