गोंडल संप्रदाय की तपस्वी साध्वीजी भगवंतों के पावन सान्निध्य में स्वामिवात्सल्य का आयोजन


मुंबई । गोंडल संप्रदाय की तीर्थस्वरूपा शासनचंद्रिका गुरुणी श्री बा.ब्र.पू. हीराबाई महासतीजी की सुशिष्या तपस्वी बा.ब्र.पू. भारतीबाई महासतीजी, ज्ञानपिपासु बा.ब्र.पू. रत्नज्योतजी महासतीजी आदि ठाणा के पावन सान्निध्य में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, केसरवाड़ी, मुंबई की ओर से रविवार, 27 सितंबर 2026 को भावपूर्ण स्वामिवात्सल्य का आयोजन श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ किया गया। साध्वीजी भगवंतों के पावन सान्निध्य से पूरे परिसर में भक्ति, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक भावनाओं का वातावरण निर्मित हुआ। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उपस्थित होकर साध्वीजी भगवंतों के दर्शन-वंदन का लाभ लिया तथा मंगल आशीर्वाद एवं धर्मलाभ प्राप्त किया। इस पावन अवसर पर श्री जैन धार्मिक शिक्षण संघ के उपाध्यक्ष संजय जीवनलाल शाह एवं जैन अल्पसंख्यक सेवा संस्थान की उपाध्यक्ष अल्पा संजय शाह ने साध्वीजी भगवंतों के प्रति अपनी श्रद्धा एवं भक्तिभाव व्यक्त करते हुए उनका भावपूर्ण बहुमान किया। संजय शाह एवं अल्पा शाह ने साध्वीजी भगवंतों के चरणों में वंदन कर धर्मशासन के प्रति अपनी श्रद्धा, आस्था एवं समर्पण की भावना व्यक्त की। साध्वीजी भगवंतों के आशीर्वाद को उन्होंने जीवन के लिए आध्यात्मिक प्रेरणा एवं धर्ममार्ग पर आगे बढ़ने वाली शक्ति बताया। इस अवसर पर वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, कांदावाड़ी से जुड़े श्रावक-श्राविकाओं की धर्म के प्रति गहरी आस्था एवं शासन के प्रति निष्ठा स्पष्ट रूप से देखने को मिली। विशेष रूप से स्थानकवासी जैन उपाश्रय के अध्यक्ष भरतभाई मनुभाई शाह एवं उपाध्यक्ष भरतभाई विराणी की धर्मशासन के प्रति भावना, सेवा-भावना तथा साधु-साध्वी भगवंतों के प्रति श्रद्धा पूरे आयोजन के दौरान विशेष रूप से दिखाई दी। स्वामिवात्सल्य के माध्यम से समाज में साधु-साध्वी भगवंतों के प्रति श्रद्धा, सेवा एवं समर्पण की भावना को और अधिक मजबूती मिली। श्रावक-श्राविकाओं ने सामूहिक रूप से इस पावन अवसर का लाभ लेते हुए धर्मआराधना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। पूरे कार्यक्रम के दौरान शासन सेवा, साधु-साध्वी भक्ति एवं धर्मआराधना की भावना का सुंदर प्रतिबिंब देखने को मिला। स्वामिवात्सल्य में सहभागी बने श्रावक-श्राविकाओं ने साध्वीजी भगवंतों के दर्शन-वंदन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया तथा सामूहिक रूप से धर्मलाभ लिया। साध्वीजी भगवंतों के पावन सान्निध्य, श्रावक-श्राविकाओं की श्रद्धा एवं संघ की सेवा-भावना से आयोजित यह स्वामिवात्सल्य समारोह धार्मिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से भावपूर्ण एवं यादगार अवसर बना। पूरे आयोजन में भक्ति, विनय, सेवा, साधना और शासन के प्रति समर्पण की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।

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