मुंबई : शिक्षा क्षेत्र की प्रतिष्ठित संस्थाओं, स्कूलों और शिक्षा विशेषज्ञों को अपने क्षेत्र के कम से कम एक महानगरपालिका स्कूल के विकास के लिए पहल करनी चाहिए, ऐसा आह्वान कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने किया। एक कार्यक्रम में शिक्षा क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। लोढ़ा ने स्पष्ट किया कि शिक्षा क्षेत्र में कार्यरत संस्थाओं को केवल अपनी संस्था तक सीमित न रहते हुए समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में कौशल विकास के महत्व पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को कम उम्र से ही विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण मिलना आवश्यक है। इससे उनमें आत्मविश्वास के साथ-साथ श्रम और मेहनत करने वाले लोगों के प्रति सम्मान की भावना भी विकसित होगी। भारत में ब्लू-कॉलर कार्यों को लेकर बनी सामाजिक मानसिकता को बदलने के लिए कौशल आधारित शिक्षा एक महत्वपूर्ण माध्यम उन्होंने रेखांकित किया कि शिक्षा केवल परीक्षा, अंक और डिग्री तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्कार, संस्कृति, मूल्य, विरासत और आत्मविश्वास भी शिक्षा के समान रूप से महत्वपूर्ण अंग हैं। बदलते समय के अनुरूप शिक्षा पद्धति में निरंतर परिवर्तन आवश्यक है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के कारण शिक्षा क्षेत्र में बड़े बदलाव हो रहे हैं।
भारत की शिक्षा व्यवस्था केवल किताबी ज्ञान पर आधारित नहीं थी, बल्कि भारत में कौशल, संस्कार, श्रम की प्रतिष्ठा, संस्कृति और जीवनोपयोगी शिक्षा की समृद्ध परंपरा पहले से रही है। ब्रिटिश शासन के दौरान इस पारंपरिक शिक्षा पद्धति को कमजोर करते हुए रटने और रोजगार-केंद्रित शिक्षा को प्राथमिकता दी गई, ऐसी भूमिका मंत्री मंगल प्रभात लोढ़ा ने रखी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से भारतीय शिक्षा की इस समृद्ध परंपरा को आधुनिक कौशल और तकनीक से जोड़कर फिर से सशक्त करने का प्रयास किया जा रहा है। कौशल आधारित शिक्षा, भारतीय संस्कृति, मूल्य, आत्मविश्वास और व्यावहारिक ज्ञान को शिक्षा की मुख्यधारा में लाकर ‘विकसित भारत’ के निर्माण की दिशा में यह नई शिक्षा व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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