पुनर्विकास परियोजनाओं में मूल निवासियों और खरीदारों के हितों की रक्षा जरूरी


विधायक राजन नाईक के प्रयासों को मिली बड़ी सफलता

अपर मुख्य सचिव असीम गुप्ता ने दिए प्रकरणनिहाय कार्रवाई के निर्देश

नालासोपारा:  वसई-विरार शहर महानगरपालिका क्षेत्र में वर्ष 2022 से 2025 के दौरान मंजूर हुई 80 से अधिक पुनर्विकास परियोजनाओं के निर्माण पर लगी रोक के बाद अब मूल निवासियों और खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए प्रकरणनिहाय निर्णय लेने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य के अपर मुख्य सचिव असीम गुप्ता ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि नागरिकों को नुकसान न हो, वहीं मामले में दोषी पाए जाने वाले बिल्डरों, आर्किटेक्ट और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

इस संबंध में विधायक राजन नाईक ने 15 सितंबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात कर निर्माण पर लगी रोक हटाने तथा ओसी (भोगवटा प्रमाणपत्र) और दस्त पंजीकरण पर लगाए गए प्रतिबंध हटाने की मांग की थी। इसके बाद सोमवार, 21 सितंबर को मुंबई में अपर मुख्य सचिव असीम गुप्ता की अध्यक्षता में विशेष बैठक आयोजित की गई।

बैठक में विधायक राजन नाईक, एमएमआरडीए के अतिरिक्त महानगर आयुक्त पी. वेलरासू, जिलाधिकारी इंदूराणी जाखड़, मनपा आयुक्त पृथ्वीराज बी.पी., विधायक स्नेहा दुबे, नगरविकास विभाग के उपसंचालक निर्मलकुमार चौधरी सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

नागरिकों को अधिकारियों की गलती का खामियाजा न भुगतना पड़े

विधायक राजन नाईक ने कहा कि तत्कालीन मनपा नियमों के अनुसार इन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी और महारेरा प्रमाणपत्र भी जारी हुए थे। ऐसे में पुराने और जर्जर भवनों से निकलकर पुनर्विकास की उम्मीद लगाए बैठे मूल निवासियों के साथ-साथ परियोजनाओं में निवेश करने वाले खरीदारों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।

उन्होंने मांग की कि अधिकारियों की कथित गलतियों के कारण नागरिकों को नुकसान नहीं होना चाहिए। दोषी पाए जाने वाले बिल्डर, आर्किटेक्ट और संबंधित अधिकारियों पर ही कार्रवाई की जानी चाहिए।

अपर मुख्य सचिव असीम गुप्ता ने इस मांग पर सहमति जताते हुए मूल निवासियों और खरीदारों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रकरणनिहाय निर्णय लेने के निर्देश दिए। उन्होंने अंतिम अथवा आंशिक भोगवटा प्रमाणपत्र देने जैसे विकल्पों पर भी विचार करने को कहा।

बैठक में यह भी जांच करने के निर्देश दिए गए कि क्या कंप्यूटर प्रणाली में प्रदर्शित चेतावनियों को नजरअंदाज कर अधिकारियों ने अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले बिल्डर, आर्किटेक्ट और अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

1500 एकड़ सरकारी जमीन पर SEZ के लिए DPR तैयार करने के निर्देश

वसई-विरार क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से नालासोपारा और वसई रेलवे स्टेशनों के आसपास लगभग 1500 एकड़ सरकारी जमीन पर विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZ) विकसित करने का प्रस्ताव भी बैठक में सामने आया।

अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि इस परियोजना में बाढ़ की स्थिति उत्पन्न न हो और पर्यावरणीय पहलुओं का भी ध्यान रखा जाए। साथ ही स्थानीय भूमिपुत्रों को विश्वास में लेकर आगे की प्रक्रिया करने पर जोर दिया गया।

निरी-आईआईटी की बाढ़ नियंत्रण रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए एमएमआरडीए के माध्यम से सलाहकार नियुक्त कर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के निर्देश अतिरिक्त महानगर आयुक्त पी. वेलरासू को दिए गए। परियोजना से रोजगार के अवसरों के साथ बाढ़ नियंत्रण में भी मदद मिले तथा विकास नियोजन में निर्धारित आरक्षण प्रभावित न हों, इसका ध्यान रखने के निर्देश भी दिए गए।

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