महापौर के दावे धड़ल्ले से गलत, नियमों की अनदेखी और भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने का आरोप



विफल नेतृत्व को फिर से स्थापित करने के लिए महापौर अजीव पाटील पर दबाव : मनोज पाटील

वसई-विरार। वसई-विरार शहर महानगरपालिका के नालासोपारा-आचोले स्थित नाट्यगृह और विरार-बोलींज स्थित क्रीड़ा संकुल के लोकार्पण समारोह को लेकर उठे विवाद के बीच विपक्ष के नेता मनोज पाटील ने महापौर अजीव पाटील के दावों पर पलटवार किया है। 4 अक्टूबर को महापौर द्वारा आयोजित पत्रकार परिषद में दिए गए स्पष्टीकरण को मनोज पाटील ने खारिज करते हुए आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ बहुजन विकास आघाड़ी अपनी गलतियों को स्वीकार करने के बजाय नियमों की अनदेखी को सही ठहराने का प्रयास कर रही है।

5 अक्टूबर को आयोजित पत्रकार परिषद में मनोज पाटील के साथ भाजपा जिलाध्यक्ष प्रज्ञा पाटील और गुटनेता अशोक शेळके उपस्थित थे।

मनोज पाटील ने कहा कि “शासकीय निर्णय (जीआर) कानून नहीं है” जैसी टिप्पणी संवैधानिक पद पर बैठे महापौर की ओर से किया जाना गंभीर है। उन्होंने आरोप लगाया कि महापालिका प्रशासन ने आयुक्त को विश्वास में लिए बिना तथा जिलाधिकारी कार्यालय से प्रोटोकॉल के अनुसार निमंत्रण पत्रिका की मंजूरी लिए बिना निमंत्रण जारी किए।

उन्होंने कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और राजशिष्टाचार का सम्मान करना महापालिका की जिम्मेदारी है। लेकिन राजनीतिक स्वार्थ के लिए नियमों और प्रोटोकॉल की अनदेखी की जा रही है।

वर्षों की देरी, करोड़ों का बढ़ा खर्च

मनोज पाटील ने क्रीड़ा संकुल और नाट्यगृह के निर्माण में हुई देरी तथा बढ़े हुए खर्च पर भी सवाल उठाए।

विरार-बोलींज क्रीड़ा संकुल: नवंबर 2017 में इसका भूमिपूजन हुआ था। करीब 39.05 करोड़ रुपये की मूल लागत वाले इस प्रकल्प को 18 महीने में पूरा किया जाना था। लेकिन छह बार समयावधि बढ़ाए जाने के बावजूद करीब नौ वर्ष बाद भी यह पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है। पाटील के अनुसार अब इसकी लागत 70 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है और अधिकारियों के मुताबिक काम पूरा होने में अभी एक से डेढ़ वर्ष और लग सकता है।

नालासोपारा-आचोले नाट्यगृह: वर्ष 2014 में करीब 3 करोड़ रुपये की लागत और दो वर्ष की समयसीमा में पूरा होने वाला यह प्रकल्प वर्षों से लंबित है। पाटील के अनुसार अब इसकी लागत करीब 8 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।

मनोज पाटील ने सवाल उठाया कि वर्षों तक प्रकल्पों को लंबित रखने से बढ़े करोड़ों रुपये के अतिरिक्त खर्च की जिम्मेदारी कौन लेगा? उन्होंने कहा कि परियोजनाओं में हुई देरी से खिलाड़ियों की एक पूरी पीढ़ी तथा कलाकारों और कला प्रेमियों का नुकसान हुआ है, जिसके लिए सत्ताधारियों को जनता से माफी मांगनी चाहिए।

उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2017 में भी क्रीड़ा संकुल के भूमिपूजन के दौरान तत्कालीन पालकमंत्री स्वर्गीय विष्णु सावरा और सांसद स्वर्गीय चिंतामण वनगा की उपस्थिति को लेकर इसी तरह का विवाद हुआ था। विरोध के बाद महापालिका को उचित निमंत्रण पत्रिका जारी करनी पड़ी थी।

‘महापालिका किसी की निजी संपत्ति नहीं’

मनोज पाटील ने कहा कि “वसई-विरार महानगरपालिका किसी की निजी संपत्ति नहीं है और न ही यह किसी का पारिवारिक कार्यक्रम है। जनता द्वारा चुने गए आमदारों और जनप्रतिनिधियों को नजरअंदाज कर केवल राजनीतिक वर्चस्व दिखाने का प्रयास किया जा रहा है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि महापौर अजीव पाटील पर पूर्व विधायक क्षितिज ठाकुर के कथित असफल नेतृत्व को दोबारा स्थापित करने और जनता के सामने लाने का राजनीतिक दबाव है। इसी दबाव के कारण महापौर नियमों के विपरीत बयान दे रहे हैं, ऐसा आरोप भी उन्होंने लगाया।

अंत में मनोज पाटील ने कहा कि महायुति के सभी पदाधिकारी नियमों के उल्लंघन और जनप्रतिनिधियों के कथित अपमान के खिलाफ एकजुट हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में इस तरह का “अराजक कारभार” बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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